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शिक्षण के चार एवं शिक्षण की अवस्थाए

 🔆शिक्षण के चर एवं शिक्षण की अवस्थाएं🔆 🔅 शिक्षण के चर➖ ऐसी चीजे या ऐसे तत्व, जो  शिक्षक को चलाने या execute करने के लिए या शिक्षण प्रक्रिया को सही तरीके से पूर्ण करने के लिए जो सहयोग प्रदान करता है या उस प्रक्रिया के लिए काम आता है,शिक्षक के चर कहलाते है । यह तीन प्रकार के होते हैं। 1)  स्वतंत्र चर  2) आश्रित चर 3) हस्तक्षेप चर ▪️1) स्वतंत्र चर➖ शिक्षण व्यवस्था का या शिक्षण कार्य का नियोजन या इस शिक्षण प्रक्रिया का परिचालन  का कार्य एक शिक्षक के द्वारा ही पूरा किया जाता है।, इसलिए इसमें  शिक्षक को स्वतंत्र चर कहा जाता है ।शिक्षक अपने शिक्षण कार्य का परिचालन सुव्यवस्थित ढ़ंग से , स्वतंत्र रूप से करता है। शिक्षक को पूरी स्वतंत्रता रहती है  कि वह अपने शिक्षण कार्य के नियोजन या प्रक्रिया के परिचालन  को सुव्यवस्थित  रूप से संचालन  कर सके । ▪️2) आश्रित चर➖ इसमें छात्र शिक्षक पर आश्रित होते है।छात्र शिक्षक के हिसाब से ही क्रियाशील होते है।शिक्षक द्वारा समझाने , नियोजन करवाने, व्यवस्था करवाना, परिचालन करना जैसे समस्त कार्य शिक्षक करता है और छ...

योजना विधि, किलपैट्रिक के द्वारा

 🔆योजना विधि🔆 ▪️इस  विधि को किलपेट्रिक द्वारा दिया गया । ▪️कार्य को सही तरीके से आसान बनाने के लिए हम योजना बनाते है। किसी भी कार्य को करने से पहले हम उसकी एक planning अपनी capacitiy,time और knowledge के हिसाब से करते हैं। ▪️जब भी हम अपने कार्य को सफल तरीके से करना चाहते है तो उसके लिए हमे अपने अनुभव के आधार पर अपना मकसद पूरा कर सकते हैं। ▪️ हमारा मकसद या हमारी शिक्षा का संप्रयोजन होना चाहिए और उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमारे पास एक योजना होना बहुत ज़रूरी है। यदि हम बिना योजना के आधार पर किसी कार्य को करते हैं तो हम अपने कार्य को कभी भी सफल तरीके से पूरा नहीं कर पाएंगे। ▪️शिक्षण के कार्य में शिक्षक को अपने अनुभव के आधार पर एवम् समय क्षमता और ज्ञान के हिसाब से एक योजना बनानी चाहिए जिससे शिक्षण कार्य को सही तरीके से और सफल तरीके से पूरा कर सकते है। ▪️हम अपनी  प्रायकिता के आधार पर अपनी capacity,time और knowledge को manage कर अपने कार्य को सफल बना सकते है। ( यदि हम अपने मकसद को या उद्घेश्य को पूरा करना चाहते है तो हम अपना वर्तमान कार्य को बेहतरीन तरीके से करने में सफल...

बुद्धि परीक्षानो का संपूर्ण निचोड़, By Ashwany Dubey.

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#teacher eligibility test  बुद्धि का मापन और बुद्धिलब्धि- Intelligence Quotient बुद्धि का मापन और बुद्धिलब्धि Intelligence Quotient:– सबसे पहला बुद्धि परीक्षण 1905 ई. मे अल्फ्रेड बिने ने साइमन की मदद से फ्रांस में बनाया। इस बुद्धि परीक्षण में 30 प्रश्न थे जोकि 3 से 14 वर्ष तक के बालकों के लिए उपयुक्त थे। यह एक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण था। यह एक व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण था। इस बुद्धि परीक्षण का नाम बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण था। सर्वप्रथम इस परीक्षण में 1908 में संशोधन हुआ और इस संशोधन में मानसिक आयु की अवधारणा को बुद्धि परीक्षण में शामिल किया गया। इस परीक्षण में दूसरा संशोधन 1911 में हुआ और प्रश्नों की संख्या बढ़ाकर 54 कर दी गई। 1916 में अमरीका की स्टैनफोर्ड वि वि में प्रोफेसर टर्मन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इस परीक्षण में संशोधन किया और प्रश्नों की संख्या 90 कर दी गई। इस परीक्षण में 1911 के परीक्षण से मात्र 19 प्रश्न शामिल किये गये जो कि इस सम्पूर्ण प्रश्नों का 1/3 हिस्सा था। 1916 में इस परीक्षण का नाम बदलकर स्टैनफोर्ड-बिने बुद्धि परीक्षण या टरमन का बुद्धि परीक्षण कर दिया गया। अमेरि...

Thorndike theory for CTET and MPTET, OTHER TET EXAMS

 एडवर्ड एल. थार्नडाइक के अधिगम के सिद्धांत- एडवर्ड एल. थार्नडाइक के अधिगम के सिद्धांत के विभिन्न नाम :- उद्दीपन-अनुक्रिया का सिद्धांत प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत संयोजनवाद का सिद्धांत अधिगम का बन्ध सिद्धांत प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत S-R थ्योरी महत्वपूर्ण तथ्य :- => यह सिद्धांत प्रसिद्ध अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ‘एडवर्ड एल. थार्नडाइक’ द्वारा प्रतिपादित किया गया। => यह सिद्धांत थार्नडाइक द्वारा सन 1913 ई. में दिया गया। => थार्नडाइक ने अपनी पुस्तक “शिक्षा मनोविज्ञान” में इस सिद्धांत का वर्णन किया हैं। => थार्नडाइक ने अपना प्रयोग भूखी बिल्ली पर किया। => भूखी बिल्ली को जिस बॉक्स में बन्ध किया उस बॉक्स को “पज़ल बॉक्स”(Pazzle Box) कहते हैं। => भोजन या उद्दीपक के रूप में थार्नडाइक ने “मछली” को रखा। थार्नडाइक का प्रयोग :- थार्नडाइक ने अपना प्रयोग भूखी बिल्ली पर किया। बिल्ली को कुछ समय तक भूखा रखने के बाद एक पिंजरे(बॉक्स) में बन्ध कर दिया। जिसे “पज़ल बॉक्स”(Pazzle Box) कहते हैं। पिंजरे के बाहर भोजन के रूप में थार्नडाइक ने मछली का टुकड़ा रख दिया। पिंजरे के अन्दर एक लिवर(बटन) ...

शिक्षण अधिगम प्रक्रिया by Ashwany Dubey and Vaishali Mishra

 🔆शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया🔆 ▪️हम शिक्षण को  ज्ञान और कौशल के संप्रेषण के रूप में  देखते हैं। 🔅ज्ञान और कुशलता -  यदि हम अपने सीखे हुए ज्ञान को एक real implementation या उसमे वास्तविक बदलाव कर लेते है तो वहीं कुशलता कहलाती है। ▪️यदि बच्चे से practically कोई काम करवाकर सिखाया जाए फिर उस काम का या  उस ज्ञान का implementation  किया जाएगा तभी  ज्ञान से कुशलता तक जाने की अधिगम प्रक्रिया पूर्ण होगी। ▪️इस प्रक्रिया में सिखाने वाला - सीखने वाले को प्रभावित करता है।, सीखने वाला इसलिए प्रभावित होता है है क्योंकि सीखने के प्रति रुचि, अभिप्रेना की भावना जागृत होती है , और वह उस समय सिखाने वाले (शिक्षक) के व्यक्तित्व, भाव,विचार या उसकी सोच ।सीखने वाले (छात्रों) को ज्यादा प्रभावित कर जाते है। यदि शिक्षक और छात्र एक दूसरे से प्रभावित या जुड़े नहीं होंगे तो अधिगम कार्य कभी सही नहीं हो पाएगा। ▪️शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे सिखाने वाला (शिक्षक) सीखने वाले(छात्र) के लिए विभिन्न परिस्थिती या माहौल या वातावरण में विभिन्न साधनों और विधियों का प्रयोग कर या निर्माण कर ...

Vishleshan and sanshleshan vidhi in detailed with deep explanation for State TET and CTET exams

 🔆 विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि🔆 * किसी विषय को गहराई से जानने,उस विषय के अलग अलग पहलू पर चर्चा करते है या जब हम उस विषय का पूरी तरह से विश्लेषण कर लेते है तब हम उस विषय के बारे में संपूर्ण या परिपूर्ण जानकारी को एकत्र कर लेते है। ✴️ विश्लेषण विधि ➖ गणिततीय दृष्टिकोण से यदि हम किसी समस्या के समाधान को निकालना चाहते हैं तो उसके लिए हम उस समस्या का विश्लेषण यानि कि उस समस्या के दुकड़े दुकड़े कर या उस अलग अलग करते हुए समाधान निकलते है। ▪️जब हम समस्या का समाधान खोजते है तो समाधान को खोजने में के लिए हम उस समस्या का विश्लेषण करते हैं जिसके फलस्वरूप हमे समस्या का समाधान मिल जाता है। ▪️यह विधि एक अनुसंधान है क्योंकि इसमें हल को खोजने पर बल दिया जाता है।( खोज करना या समस्या पर माथा पच्ची या दिमाग लगाकर या उस समस्या पर पंचायत कर या कहे विश्लेषण कर उस समस्या का उचित समाधान निकाला जा सकता है।) ▪️किसी भी विषय या वस्तु जो हमे जटिल लगती है उनको सरल बनाने के लिए ,इसके साथ ही जो विषय या चीजे जो हम नहीं जानते है या हम उससे अज्ञात है, उन्हें जानने के लिए या उन्हें ज्ञात करने के लिए इस विधि को प्र...

Jean piaget sangyanatmak vikas ke detailed notes by Ashwany Dubey for State TET and CTET, KVS, NVS,DSSSB

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  Jean Piaget’s- Adaptation , Assimilation , Accommodation , Cognitive structure , Mental operation, Schemes , Schema Jean Piaget’s- Adaptation , Assimilation , Accommodation , Cognitive structure , Mental operation, Schemes , Schema संज्ञानात्मक विकास के सम्बन्ध में जीन पियाजे का योगदान सर्वोपरि है। जीन पियाजे (1896-1980) स्विट्जरलैण्ड के एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने प्राणि-विज्ञान में शिक्षा प्राप्त की थी, इनकी रुचि यह जानने की थी कि बालकों में बुद्धि का विकास किस ढंग से होता है। इसके लिए उन्होंने अपने स्वयं के बच्चों को अपनी खोज का विषय बनाया। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते गये, उनके मानसिक विकास सम्बन्धी क्रियाओं का वे बड़ी बारीकी से अध्ययन करते रहे। इस अध्ययन के परिणामस्वरूप उन्होंने जिन विचारों का प्रतिपादन किया उन्हें पियाजे के मानसिक या संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है। जीन पियाजे ने 1923 से 1932 के बीच पाँच पुस्तकों को प्रकाशित कराया, जिनमें संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया गया। जीन पियाजे का मानना था कि बच्चे खेल प्रक्रिया के माध्...

Shikshan Sutra aur unka detail study for State TET and CTET

 "शिक्षण सूत्र"➖इनका प्रयोग बच्चे को बेहतर रूप से सिखाने के लिए किया जाता है। ▪️ज्ञात से अज्ञात की ओर- जो चीजे हमे पहले से पता होती है या ज्ञात होती है उन ज्ञात चीजों की मदद से अज्ञात चीजों को या जो हम नहीं जानते है उन्हें जानना हमारे लिए बहुत आसान हो जाता है। * जब भी हम किसी विषय या वस्तु के बारे में बेहतर रूप से बताना चाहते है तो वह विषय या वस्तु  उस व्यक्ति से जुड़ी हुई हो,उसकी उस विषय में रुचि हो, उसे कुछ पूर्व ज्ञान हो तब ही आप उसे आसान, प्रभावी और बेहतर  और पूर्ण रूप से समझा पाएंगे। ▪️ सरल से जटिल की ओर➖ *दुनिया में किसी भी व्यक्ति स्थान, समय और परिस्थिति के अनुसार ही सरल और जटिल की परिभाषा अलग अलग प्रकार से होती है। *जब हम चीजों के बारे में जानते है तो वह हमे काफी सरल लगने लगती है  और जब हम इन्हीं सरल चीजो के द्वारा जटिल चीजों को जानने का प्रयास करते है तो फिर हमे यह चीजे भी काफी आसान लगने लगती है। जैसे यदि हम गणित में छोटी छोटी गणना जैसे जोड़, गुणा, भाग,घटाव के बारे में जानते है तो हमे गणित की जटिल प्रक्रिया को समझना आसान हो जाता है। ▪️ स्थूल से सूक्ष्म की ओर...

Aagman and Nigman vidhi for state TET and CTET By Vaishali Mishra

🔆आगमन और निगमन विधि🔆 🔅आगमन विधि➖शिक्षण अधिगम की सर्वोत्तम विधि है। यह  नए ज्ञान को खोजने के अवसर प्रदान करती है एवं अनुसंधान मार्ग को भी प्रशस्त करती हैं। जब हम किसी चीज की जरूरत होती हैं या हमे किसी कार्य को पूरा करने के में कोई समस्या आती हैं तो हम उस समस्या का समाधान या उस जरूरत को पूरा करने के लिए खोज करते है जिससे हमे कई सारे नवीन ज्ञान प्राप्त होते है। * और जब भी हम नए ज्ञान को खोज लेते हैं या अनुसंधान कर लेते हैं तो एक निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं जिससे हमारे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि हम खुद से उस कार्य को करते है,उस परिस्थिति में शामिल होते है जिससे हमे रटना नहीं पड़ता और हमे अनुभव भी प्राप्त हो जाते है। ▪️आगमन विधि के गुण➖ 1 नवीन ज्ञान को खोजने का प्रशिक्षण 2 नवीन ज्ञान को अर्जन करने का अवसर प्राप्त होता हैं। 3 मनो वैज्ञानिक विधि है। 4 बच्चो से सामान्य नियम निकलवाए जाते हैं जिससे उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास गुणों का विकास होता है। 5 बालक उदहारणो का विशलेषण करते हुए सामान्य नियम स्वयं से निकाल लेते है। 6इसमें सीखा हुआ ज्ञान स्थाई होता हैं,क्योंकि बच्चा खुद से करक...

Aagman vidhi for all State TET and CTET exam By Ashwany Dubey

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Shalini Kushwah decorative designs

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