Aagman and Nigman vidhi for state TET and CTET By Vaishali Mishra

🔆आगमन और निगमन विधि🔆


🔅आगमन विधि➖शिक्षण अधिगम की सर्वोत्तम विधि है। यह  नए ज्ञान को खोजने के अवसर प्रदान करती है एवं अनुसंधान मार्ग को भी प्रशस्त करती हैं।

जब हम किसी चीज की जरूरत होती हैं या हमे किसी कार्य को पूरा करने के में कोई समस्या आती हैं तो हम उस समस्या का समाधान या उस जरूरत को पूरा करने के लिए खोज करते है जिससे हमे कई सारे नवीन ज्ञान प्राप्त होते है।

* और जब भी हम नए ज्ञान को खोज लेते हैं या अनुसंधान कर लेते हैं तो एक निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं जिससे हमारे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि हम खुद से उस कार्य को करते है,उस परिस्थिति में शामिल होते है जिससे हमे रटना नहीं पड़ता और हमे अनुभव भी प्राप्त हो जाते है।

▪️आगमन विधि के गुण➖

1 नवीन ज्ञान को खोजने का प्रशिक्षण

2 नवीन ज्ञान को अर्जन करने का अवसर प्राप्त होता हैं।

3 मनो वैज्ञानिक विधि है।

4 बच्चो से सामान्य नियम निकलवाए जाते हैं जिससे उनमें रचनात्मकता, आत्मविश्वास गुणों का विकास होता है।

5 बालक उदहारणो का विशलेषण करते हुए सामान्य नियम स्वयं से निकाल लेते है।

6इसमें सीखा हुआ ज्ञान स्थाई होता हैं,क्योंकि बच्चा खुद से करके कार्य को सीखता है।

कार्यरत- 

* उदाहरण से नियम की ओर

* विशिष्ठ से सामान्य की ओर ( विशिष्ठ परिस्थिति से सामान्य की ओर)

*स्थूल से सूक्ष्म की ओर

*ज्ञात से अज्ञात की ओर

*मूर्त से अमूर्त की ओर


▪️आगमन विधि के दोष➖

1 प्रत्येक विषय को पड़ाने या समझाने के लिए उपयुक्त हो यह संभव नहीं है।

2 आधुनिक समय की कक्षा पद्धति जिसमे हर व्यक्ति को तुरन्त ही कुछ न कुछ चाहिए होता हैं इसलिए इस  आगमन विधि से उसे तुरन्त पूरा नहीं किया जा सकता है।

( हर कोई अपने ज्ञान को तुरन्त ही प्राप्त करना चाहता है जिससे उनकी धैर्य क्षमता भी खत्म हो जाती हैं।)

3 सीखने की शक्ति व समय अधिक लगता है।

4 केवल सामान्य नियमो की खोज

5 यह विधि स्वयं में अपूर्ण है क्योंकि इसमें खोजे हुए सत्य की परख के लिए निगमन विधि की आवश्यकता होती हैं।

🔅 निगमन विधि ➖

( Put the value get the result)

इसमें शिक्षक नियमो का उल्लेख करता है और उन  उल्लेखित नियमो के आधार पर छात्र सीखता है।

लेकिन छात्र इसमें खुद से कार्य को पूरा नहीं करता है बल्कि शिक्षक द्वारा बताए गए नियम के आधार पर ही अपने कार्य को पूरा करता है और अपनी जरूरतों को पूरा करता है या अपनी समस्या को पूरा करता है 6 उसका यह ज्ञान स्थाई नहीं हो पाता है तथा साथ ही साथ छात्र को अनुभव भी प्राप्त नहीं हो पाता है।

▪️ निगमन विधि के गुण➖

* निगमन विधि से शिक्षण कार्य तेजी से होता है।

* इसमें कम समय में अधिक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

* उच्च कक्षा के छात्रों के लिए ज्यादा प्रभावी होती हैं।

* इसमें शिक्षक व छात्र दोनों को ही कम मेहनत करनी पड़ती है।

* इसमें रटना होता है इसलिए स्मरण शक्ति का विकास होता है।

▪️ निगमन विधि के दोष➖

* रटने को प्रोत्साहित या बढ़ावा देती है जो कि सही नहीं है।

* वैज्ञानिक विधि नहीं है।

*बच्चो में आत्मविश्वास  का विकास नहीं हो पाता है।

* नियमो पर आश्रित रहना पड़ता है।


                    वैशाली मिश्रा..

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