Vishleshan and sanshleshan vidhi in detailed with deep explanation for State TET and CTET exams
🔆 विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि🔆
* किसी विषय को गहराई से जानने,उस विषय के अलग अलग पहलू पर चर्चा करते है या जब हम उस विषय का पूरी तरह से विश्लेषण कर लेते है तब हम उस विषय के बारे में संपूर्ण या परिपूर्ण जानकारी को एकत्र कर लेते है।
✴️ विश्लेषण विधि ➖ गणिततीय दृष्टिकोण से यदि हम किसी समस्या के समाधान को निकालना चाहते हैं तो उसके लिए हम उस समस्या का विश्लेषण यानि कि उस समस्या के दुकड़े दुकड़े कर या उस अलग अलग करते हुए समाधान निकलते है।
▪️जब हम समस्या का समाधान खोजते है तो समाधान को खोजने में के लिए हम उस समस्या का विश्लेषण करते हैं जिसके फलस्वरूप हमे समस्या का समाधान मिल जाता है।
▪️यह विधि एक अनुसंधान है क्योंकि इसमें हल को खोजने पर बल दिया जाता है।( खोज करना या समस्या पर माथा पच्ची या दिमाग लगाकर या उस समस्या पर पंचायत कर या कहे विश्लेषण कर उस समस्या का उचित समाधान निकाला जा सकता है।)
▪️किसी भी विषय या वस्तु जो हमे जटिल लगती है उनको सरल बनाने के लिए ,इसके साथ ही जो विषय या चीजे जो हम नहीं जानते है या हम उससे अज्ञात है, उन्हें जानने के लिए या उन्हें ज्ञात करने के लिए इस विधि को प्रयोग में लाते हैं।
▪️ इसके द्वारा हम अपनी तर्क शक्ति को भी विकसित कर पाते है ।जैसे कि यदि हमारे पास कोई समस्या होती है तो उसके समाधान निकालने के लिए उस समस्या पर तर्क लगाते है।
✴️ संश्लेषण विधि➖
जब हमारे पास कोई समस्या होती है या हम किसी वस्तु या विषय के बारे में जानना चाहते है तब हम उस समस्या के दुकड़े या जो अलग अलग रूप से बटी हुई है उन्हें पुनः से एकत्रित करना ही संश्लेषण कहलाता है।
🔅 जब हम संश्लेषण से विश्लेषण की ओर जाते है तो हमे इस सकारात्मक बिंदु का भी ध्यान रखना चाहिए-
* जब भी हम किसी विषय या किसी वस्तु के बारे में जानना चाहते हैं तो उसके लिए कई समस्या सामने आती है इन समस्याओं के समाधान निकालने से हमे जी परिणाम प्राप्त होते है वह win win situation में हो , यानि कि जब भी कोई बात बताई जाए या पता की जाए तो अंत में उसका जो भी परिणाम प्राप्त हो उससे बताने वाले ओर पूछने वाले या समझने वाले दोनों का ही फायदा या जीत हो या दूसरे रूप में कहे जी भी परिणाम प्राप्त हो वह दोनों के सकारात्मक पक्ष के लिए हो।
➖जैसे कि यदि कोई शिक्षक अपनी बातो को छात्रों को बताता है या उन तक input करता है और फिर उसे छात्रों द्वारा प्राप्त कर output दे देता है तो यहां पर शिक्षक और छात्र दोनों को ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते है जो कि दोनों के पक्ष में होंगे।
▪️जब भी हम किसी विषय का संश्लेषण करते है तो हम उस विषय के प्रत्येक बिंदु या दुकड़ो को या हर पहलु को या सभी पक्षों पर विश्लेषण कर इन सभी का पुनः एकत्रिकरण कर या मिलाकर उस विषय का उचित रूप से निर्माण या संश्लेषण कर पाते है।
🔅 विश्लेषण और संश्लेषण में अंतर➖
▪️दोनों ही एक दूसरे पर पूरी तरह से निर्भर या विपरीत है इसलिए इन दोनों का ही होना जरूरी है यदि दोनों में से कोई भी रुक गया तो सही तरह से कार्य नहीं हो पायेगा।
▪️यह विधि एक मनोवैज्ञानिक विधि है ।इसमें अन्वेषण क्षमता या अनुसंधान या खोज करने की क्षमता का विकास होता है। इसमें छात्रों की अन्तर्दृष्टि का विकास होता है।
▪️जब भी हम किसी समस्या का विश्लेषण करते है तो हमे उस समस्या का उचित प्रकार से संश्लेषण कर समाधान निकाल लेते है।
🔅 युंग का कथन है कि किसी भूसे के ढ़ेर से एक छोटे से दुकड़े को निकालना संश्लेषण है जबकि भूसे के ढेर से दुकड़े का खुद से निकालना या प्राप्त दुकड़ा विश्लेषण कहलाता है।
हम संश्लेषण में ज्ञात से अज्ञात और विश्लेषण में इसके विपरित अज्ञात से ज्ञात की ओर जाते है।
▪️यदि हम किसी विषय या वस्तु का विश्लेषण नहीं कर रहे होते है तब हम दिए हुए विश्लेषण के आधार पर ही अपना विश्लेषण लगाकर उस विषय या वस्तु का संश्लेषण कर पाते हैं।
By ✍🏻 वैशाली मिश्रा
🌸विश्लेषण और संश्लेषण विघि: ''किसी चीज के बारे मे गहराई से जानना " किसी बात के अलग अलग पहलू पर चर्चा करना ही विश्लेषण कहलाता है ।ये सारे छोटे छोटे भाग किसी एक को परिपूर्ण करती है ।इकठ्ठी की गई वस्तु को अलग अलग भाग मे divide करके उसके बारे मे गहराई से जानना ही विश्लेषण विधि है । (उदाहरण - गणित विषय का कोई पश्न मे क्या दिया है ,और क्या दिया है ,क्या ज्ञात करना ह ,कैसे ज्ञात हो सकता है ,एैसै विश्लेषण करके उसके आखिरी उत्तर तक पहुँच जाते है ।) 🌸1 यह एक अनुसंधान विधि है जिसके अन्तर्गत किसी एक वस्तु को टुकडों में बाटकर उसे गहराई तक खोज कर उसका research करते है ।🌹2🌹यह विधि जटिल से सरल की ओर चलती है :- अर्थात कोई वस्तु या पकरण यदि जटिल है उसे विश्लेषित करके उसका सरलीकरण करते है। 🌺3🌺अग्यात से ग्यात की ओर : जो चीज नही पता है उसके बारे मे गहराई से खोज कर जो पता है उसकी ओर चलते है। विश्लेषण विधि के गुण :- (1)इस विधि से बच्चे की तर्क शक्ति का विकास होता है। (2) इस विधि के द्वारा बच्चे की खोज करने की क्षमता का विकास होता है।(3) इस विधि के द्वारा बच्चों में एक समस्या को लेकर उस समस्या को अलग-अलग पहलू में सोच कर उसका समाधान करने की आदत विकसित होती हैं। यदि किसी व्यक्ति में विश्लेषण करने की क्षमता है तो किसी भी वे डिसीजन को ले पाएंगे🌺 विश्लेषण विधि के दोष:- (1) समय अधिक लगता है ।2) अधिकतर क्षति की जरूरत होती है जो छोटे बच्चों के पास नहीं होती इसीलिए विधि छोटे बच्चों के लिए अनुपयोगी है🌺 🌸🌸संश्लेषण विघि🌸🌸 किसी समस्या को टुकड़ों में या भाग में या अलग-अलग करके उसे इकट्ठा या एकत्रित करना ही संश्लेषण कहलाता है । यह विधि विश्लेषण विधि के ठीक विपरीत होता है। अर्थात अनेक को एक कर देना कि संश्लेषण है। किसी समस्या के छोटे-छोटे टुकड़ों का समाधान करके पुणे एकत्रीकरण करना ही संश्लेषण कहलाता है। उदाहरण - जैसे हम हिंदी विषय में बच्चे को पहले वर्णमाला को सिखाते हैं फिर उसके बाद शब्द बनाना या वाक्य बनाना सिखाया जाता है। 🌺 संश्लेषण विधि के गुण🌺 (1) यह विधि ज्ञात से अज्ञात की ओर ले जाती है अर्थात जो पता है उसका प्रयोग करके जो नहीं पता है उसकी प्राप्ति की जाती है।(2) इस विधि में किसी समस्या का हल कर एकत्रित करने के लिए उस समस्या से संबंधित पूर्व ज्ञात सूचनाओं को एक साथ मिलाकर समस्या को हल करने का प्रयत्न किया जाता है। 🌺 विश्लेषण -संश्लेषण विधि। विश्लेषण और संश्लेषण विधि के ठीक बिल्कुल विपरीत है किसी भी समस्या के निश्चित समाधान तक पहुंचने के लिए दोनों का होना जरूरी है अर्थात विश्लेषण और संश्लेषण एक दूसरे के पूरक हैंl 🌸prof yung ke sbdo ke anusar🌸 - "संश्लेषण विधि द्वारा सूखी घास से तिनका निकाला जाता है किंतु विश्लेषण विधि से तिनका स्वयं घास से बाहर निकल आया है" अर्थात संश्लेषण विधि म जो ज्ञात है से जो ज्ञात नहीं है अर्थात अज्ञात की ओर अग्रसर होते हैं।🌸 by manisha gupta 🌸
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