योजना विधि, किलपैट्रिक के द्वारा

 🔆योजना विधि🔆

▪️इस  विधि को किलपेट्रिक द्वारा दिया गया ।

▪️कार्य को सही तरीके से आसान बनाने के लिए हम योजना बनाते है।

किसी भी कार्य को करने से पहले हम उसकी एक planning अपनी capacitiy,time और knowledge के हिसाब से करते हैं।

▪️जब भी हम अपने कार्य को सफल तरीके से करना चाहते है तो उसके लिए हमे अपने अनुभव के आधार पर अपना मकसद पूरा कर सकते हैं।

▪️ हमारा मकसद या हमारी शिक्षा का संप्रयोजन होना चाहिए और उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमारे पास एक योजना होना बहुत ज़रूरी है।

यदि हम बिना योजना के आधार पर किसी कार्य को करते हैं तो हम अपने कार्य को कभी भी सफल तरीके से पूरा नहीं कर पाएंगे।

▪️शिक्षण के कार्य में शिक्षक को अपने अनुभव के आधार पर एवम् समय क्षमता और ज्ञान के हिसाब से एक योजना बनानी चाहिए जिससे शिक्षण कार्य को सही तरीके से और सफल तरीके से पूरा कर सकते है।

▪️हम अपनी  प्रायकिता के आधार पर अपनी capacity,time और knowledge को manage कर अपने कार्य को सफल बना सकते है।

( यदि हम अपने मकसद को या उद्घेश्य को पूरा करना चाहते है तो हम अपना वर्तमान कार्य को बेहतरीन तरीके से करने में सफल होंगे।)

 

🔅योजना विधि के गुण➖

1 तर्क शक्ति का विकास होता है।

2 अमूर्त चिंतन का विकास कर पाते है।

3 निरीक्षण क्षमता का विकास होता हैं।

4 अनुभव द्वारा सीखने को बढावा मिलता है।

5 सहज रूप से हमारे अंदर परिस्थिति को संभालने की क्षमता बढ़ती है।

6 निर्णय लेने की क्षमता का विकास हो जाता है ।

इन सभी गुणों को एक सार रूप में कह सकते है कि योजना विधि द्वारा  क्रियात्मक और सृजनात्मकता का विकास होता है।

🔅योजना बनाने के चरण➖

1 समस्या उत्पन्न करना ( स्थिति या task)

2 समस्या या चुनना ( कार्य का चयन)

3 योजना बनाना

4 योजना क्रियान्वयन (निष्पादन)

5 कार्य का निर्णय (मूल्यांकन)

6 कार्य का लेखा जोखा ( Reporting  और recording)


🔅 विभिन्न कथन➖

▪️बेकन➖ गणित सभी विज्ञान का प्रवेश द्वार की कुंजी है।

▪️ बर्नाड शॉ➖ तार्किक चिंतन के लिए गणित एक शक्तिशाली साधन है।

▪️होगबेन➖ गणित संस्कृति का दर्पण है।

▪️ आइंस्टीन➖गणित उस मानव चिंतन का प्रतिफल है ,जो अनुभव से स्वतंत्र है और सत्य के अनुरूप है।

▪️ रॉबर्ट पियर्स➖गणित एक विज्ञान ही है जिसकी सहायता से आवश्यक निष्कर्ष निकाले जाते हैं।


🔅योजना विधि के दोष➖ हर विषय या हर कार्य को इस विधि द्वारा कर पाना संभव नहीं है क्योंकि हमें उसके लिए उस कार्य में या विषय में अनुभव होना काफी जरूरी है।

▪️सभी कार्य की planning नहीं कर पाते है क्योंकि किसी कार्य को करने में ज्यादा समय लगता है किसी कार्य में कम।

 

उपर्युक्त विधि से यह निष्कर्ष निकलता है कि योजना विधि बहुत ही अच्छी विधि है जिसका आप अपनी कार्य की प्राथमिकता के आधार पर अपनी क्षमता,ज्ञान समय के हिसाब से एक योजना बनाकर अपने कार्य को सफल रूप से कर पाएंगे ओर कार्य के सफल होने पर निश्चित ही हमारा उद्देश्य पूरा हो जाता है।


                  ✍🏻वैशाली मिश्रा

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