Shikshan Sutra aur unka detail study for State TET and CTET
"शिक्षण सूत्र"➖इनका प्रयोग बच्चे को बेहतर रूप से सिखाने के लिए किया जाता है।
▪️ज्ञात से अज्ञात की ओर- जो चीजे हमे पहले से पता होती है या ज्ञात होती है उन ज्ञात चीजों की मदद से अज्ञात चीजों को या जो हम नहीं जानते है उन्हें जानना हमारे लिए बहुत आसान हो जाता है।
* जब भी हम किसी विषय या वस्तु के बारे में बेहतर रूप से बताना चाहते है तो वह विषय या वस्तु उस व्यक्ति से जुड़ी हुई हो,उसकी उस विषय में रुचि हो, उसे कुछ पूर्व ज्ञान हो तब ही आप उसे आसान, प्रभावी और बेहतर और पूर्ण रूप से समझा पाएंगे।
▪️ सरल से जटिल की ओर➖
*दुनिया में किसी भी व्यक्ति स्थान, समय और परिस्थिति के अनुसार ही सरल और जटिल की परिभाषा अलग अलग प्रकार से होती है।
*जब हम चीजों के बारे में जानते है तो वह हमे काफी सरल लगने लगती है और जब हम इन्हीं सरल चीजो के द्वारा जटिल चीजों को जानने का प्रयास करते है तो फिर हमे यह चीजे भी काफी आसान लगने लगती है।
जैसे यदि हम गणित में छोटी छोटी गणना जैसे जोड़, गुणा, भाग,घटाव के बारे में जानते है तो हमे गणित की जटिल प्रक्रिया को समझना आसान हो जाता है।
▪️ स्थूल से सूक्ष्म की ओर➖
* जब हम किसी चीज के बारे में बड़े रूप में, बेहतर रूप से , स्थूल रूप से जानते है तो उसे संक्षिप्त या सारांश के रूप में या छोटे रूप में बताना काफी आसान हो जाता है।
*जैसे यदि हम किसी को बताए कि हमारी क्लासेस आज हुई थी,कल हुई थी, परसो हुई थी,आगे भी होगी...तो यह बड़े रूप से जानना हो जाएगा लेकिन इसी बात को हम बोले की हमारी क्लासेस रोज होती है तो यह छोटे रूप में या सूक्ष्म रूप में बताना हो जाता है ।सूक्ष्म रूप से बताने में चीजे आसानी से ओर बेहतर तरीके से समझ आ जाती हैं।
*जैसे यदि हम बताए कि सभी अभाज्य संख्याएं एक से या खुद से ही विभाजित होती है तो यह सूक्ष्म रूप से बताना होगा लेकिन जब हम यह बोले कि 3 एक अभाजय है और वह 3,1,11,17,19 21....से विभाजित होती है तो यह स्थूल रूप से बताना हो जाता है।
▪️प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष/मूर्त सेअमूर्त➖
जो चीजे हमारे सामने है या प्रत्यक्ष रूप से या मूर्त रूप में होती है उन्हीं के द्वारा जब हम उन चीज़ों के बारे में बताते है जो हमारे सामने नहीं है,अमूर्त है या अप्रत्यक्ष है ,तब वहां बताना काफी आसान हो जाता है।
▪️पूर्ण से अंश की ओर➖
इसमें बच्चे को संपूर्ण ज्ञान से एक अंश की ओर के जय जाता है।
जब हम किसी विषय या वस्तु के बारे में समस्त जानकारी या ज्ञान को जानते है तब ही हम उस विषय के बारे में उसका बेहतर और आसान रूप से अंश बता पाएंगे।विषय के overview से किसी particular अंश को बेहतर तरीके से define किया जा सकता है।
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अनिश्चित से निश्चित की ओर➖जो चीजे हमारे लिए निश्चित नहीं है या अनिश्चित है उन्हीं की द्वारा हम निश्चित चीजों के बारे में बेहतर जान पाते है।
* जब हमे चीजे पता नहीं होती है या हमारे लिए अनिश्चित होती है लेकिन जब उसे बता दिया जाता है तब वह चीजे हमारे लिए निश्चित हो जाती है।ओर उन्हें समझना काफी आसान और बेहतर हो जाता है।
▪️ विश्लेषण से संश्लेषण की ओर➖किसी भी विषय या वस्तु के बारे में अलग अलग रूप से या टुकड़ों में या छोटे छोटे रूप में या उसका विखंडन करके बताया जाता है तो यह विश्लेषण कहलाता है ओर हम इसी विश्लेषण के द्वारा ही प्राप्त ज्ञान को जब एक सार कर एक रूप से निर्मित कर देते है तब यह संश्लेषण कहलाता है।
▪️ विशिष्ठ से सामान्य की ओर➖
जब किसी विशिष्ठ परिस्थिति में सीखा हुआ ज्ञान हमारे पास होता है तो उसे हम सामान्य रूप से बता पाते है।
जैसे यदि हमारे पास यह विशिष्ठ ज्ञान है कि हमारे यहां पर 1 घंटे के लिए बिजली आज गई थी,कल भी गई थी,परसो भी गई थी ,आगे दो दिन भी जाएगी ,या आगे भी जाती रहेगी यह सब बताने कि बजाय यह बता दिया जाए कि प्रतिदिन हमारे यहां पर बिजली एक घंटा जाती है तो यह सामान्य रूप में बताना हो जाता है। ज्ञान को विशिष्ठ से सामान्य रूप में बताने पर वह ज्ञान सरल ओर बेहतर तरीके से समझने योग्य हो जाता है।
▪️ मनो वैज्ञानिक से तार्किकता की ओर➖जब हमारे दिमाग में या हमारे मन में कोई बात या ज्ञान होता है और जब हम इसी ज्ञान पर तर्क लगाते है तो समझना काफी आसान हो जाता है।
* जब हम अपने मन के ज्ञान का प्रयोग ,जिसे हमने देखा है उसी ज्ञान का प्रयोग ,जिसे हमने नहीं देखा है उस पर तर्क लगाने लगते है।
▪️ अनुभव से युक्ति की ओर➖
हमारे पास पूर्व से कुछ प्राप्त अनुभव होते है और इन्हीं अनुभव का प्रयोग हम युक्ति या concept को बेहतर तरीके से समझने में प्रयोग करने लगते है।
वैशाली मिश्रा..
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