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जीन पियाजे द्वारा वस्तु स्थायित्व वर्णन, Notes By Ashwany Dubey
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Notes By Ashwany Dubey 🌼🌼वस्तु स्थायित्व(object permanence) 🌼🌼 (मूर्त से अमूर्त की ओर stability) ✍️ हर वो वस्तु जो हमारे सामने है या सामने नहीं भी है लेकिन हमे उसकी समझ होती है उसका ज्ञान जब हमे होता है तो यदि वो वस्तु जब हमारे सामने नहीं होती तब हम उसको खोज सकते है! ✍️यदि कोई वस्तु बच्चे के सामने अभी नहीं भी है और बच्चा उसको नहीं देख पा रहा है तब भी जो उसको ज्ञान या समझ उस वस्तु के बारे मे है और वह उसको खोज रहा है तब वह वस्तु स्थायित्व को दर्शाता है! ✍️ वस्तु स्थायित्व 0-2 वर्ष मे प्रारंभ हो जाता है! ✍️2 वर्ष के पश्चात बच्चा वस्तु स्थायित्व को प्रदर्शित करता है! ✍️जो कि पूर्व सांक्रियात्मक अवस्था कहलाती है! 🌻🌻जीन पियाजे ने बच्चों मे वस्तु स्थायित्व के प्रारम्भ से पूर्ण प्रदर्शित होने के -- 6 चरण दिए है! 👉 1) 0 से 1 माह => बच्चा ख़ुद से कोई दिमाग नहीं लगाता है, वो अपने आप मे रहता है इस अवस्था मे वस्तु स्थायित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है! 2) 1 से 4 माह => इस अवस्था मे बच्चे के जो सामने है वो दिमाग मे होता है लेकिन ज...
Bloom Taxonomy By Ashwany Dubey
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By Ashwany Dubey 🏵️ Bloom Taxonomy 🏵️ 👉 1956 मे बेंजामिन ब्लूम ने शिक्षा को ग्रहण और संप्रेषण के संदर्भ मे शैक्षिक उद्देश्यो का मानकीकृत वर्गीकरण किया! 👉शैक्षिक उद्देश्यों का मूल आधार ज्ञान को माना गया क्योकि ब्लूम Taxonomy से यह जान पाते है कि हमे जो भी ज्ञान संप्रेषित करना है उसका क्या अच्छा और कितना उपयोग किया जा सकता है जो कि उसके भाव को पता करके ही ज्ञात किया जा सकता है! 👉 किसी भी विषय के भाव को समझने के लिए हमे उसका ज्ञानात्मक पक्ष जानना उतना ही आवश्यक जितना बेहतर तरीके से हम उसका उपयोग करना चाहते है! 👉ज्ञान को प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि विषय वस्तु समझने मे आसान, शुद्ध और क्रमानुसार होनी चाहिए! इससे यह पता चला कि सीखने या सिखाने के दौरान ज्ञान के बिना भावनात्मक और क्रियात्मक पक्ष का ज्ञान अधूरा है! 🌺 बेंजामिन ब्लूम ने शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु शिक्षा के किसी भी विषय के 3 क्षेत्रों (domain) को दिया :- 1)ज्ञानात्मक क्षेत्र (cognitive domain) 2)भावनात्मक क्षेत्र (pathetic domain) 3)क्रियात्मक क्षेत्र (applicable domain) ✍️ संज्ञानात्मक क्षे...
Full CDP for mptet oneliner
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अधिगम EDUCATION PSYCHOLOGY अधिगम ➤अधिगम का संक्रीर्ण अर्थ- सीखना ➤व्यापक अर्थ - अधिगम व्यवहार में परिवर्तन की एक प्रक्रिया है। ➤सन् - 1905 में सर्वप्रथम व्यवहार शब्द का प्रयोग मैक्डूगल ने अपनी पुस्तक Out Line Of Psychology में व्यवहार शब्द काे परिभाषित किया था। ➤ अभ्यास प्रशिक्षण और अनुभव के कारण व्यक्ति के व्यवहार में आये स्थाई परिवर्तन को अधिगम कहते है। ⇰ इन कारणों से परिवर्तन सम्भव है- 1- परिपक्वता 2- बिमारी 3- थकान 4- संवेगात्मक विकास 5- मादक पदार्थों का सेवन 6- मूल प्रवृत्ति [ वह कार्य जो जन्म जात होते हैं ] Note- इन कारणों से व्यवहार में आये परिवर्तन को अधिगम नहीं कहते हैं। ⇰ अधिगम की परिभाषा - ➤ क्रो-क्रो के अनुसार- सीखना आदतों अभिवृत्तियों का अर्जन है। ➤ गिलफोर्ड के अनुसार - व्यवहार के कारण व्यवहार मे आया कोई भी परिवर्तन अधिगम कहलाता है। ➤ विलियम वुडवर्थ- 1 अधिगम विकास की एक प्रक्रिया है ...
Jean piaget by Vaishali mishra
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🔆जीन पियांजे के अन्तर्गत आने वाली कुछ terms🔆 बच्चो के बौद्धिक विकास के लिए ◼️अनुकूलन(Adaptation)➖वातावरण के साथ समायोजन की जो प्रकृति है वहीं अनुकूलन कहलाती है।इस परिस्थिति में हम अपने आप को ढाल लेते है। बच्चे ने वातावरण के साथ समायोजन करने की प्रवृति जन्म से ही आ जाती है अर्थात बचा जैसे ही जन्म लेता है उसमे समायोजन की प्रवृति विकसित होने लगती है। जब बच्चा जन्म लेता है तो उसके सामने कई तरह के उदीपक होते है जैसे भूख , प्यास आदि इन्हीं उदिपक से उन्हें पुनरबलन मिलता है। बच्चा जैसे जैसे बड़ा होता जाता है उसमे नए नए उदीपक आते जाते है जैसे इच्छा जाग्रत होना, जरुरते होना आदि। साधारण रूप से जन्म लेने के बाद जो भी नई नई परिस्थितिया आती है उन्हें हम वातावरण के साथ अपनी जरूरतों के हिसाब से समायोजित करने या अनुकूलित करने लगते है । हम अपनी शारीरिक अनुकूलता को मानसिक अनुकूलता के द्वारा बदल सकते है। अनुकूलन - बाहरी रूप से जो भी प्रक्रिया या स्थिति है ,उस प्रक्रिया या स्थिति को अपने अंदर ढालने की प्रक्रिया ही अनुकूलन कहलाती हैं। वातावरण के साथ हम अपने आप को संगठित करते है और इन सगठन से हम...
अभिप्रेरणा by Vaishali Mishra
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Notes By➖ Vaishali Mishra 🔆 अभिप्रेरणा और अधिगम🔆 (Motivation and learning) ▪️अभिप्रेरणा लेटिन भाषा के शब्द Motum से लिया गया है जिसका शब्दिक अर्थ गति है अर्थात कार्य की बढ़ाना है। " कोई भी कारण,कोई भी मजबुरी,कोई भी संवेग,कोई भी जरूरत,रुचि होती है ,अपने आप को बेहतर दिखाना चाहते है तब हम अभीप्रेरित होते है। ▪️ अभिप्रेरणा के प्रकार➖ दो प्रकार से होती है। 1) आंतरिक अभिप्रेरणा/ व्यक्तिगत प्रेरणा/ जैविक प्रेरणा/प्राथमिक प्रेरणा/जन्मजात प्रेरणा➖जब किसी काम को करने में हमारी स्वयं की इच्छा या हमारे दिल से होती है ,तब वह आंतरिक अभिप्रेरणा कहलाता है। जैसे - भूख,प्यास, नीद,क्रोध इत्यादि। 🔅 बाह्य अभिप्रेरणा/अर्जित प्रेरक/सामाजिक प्रेरणा/मनोवैज्ञानिक प्रेरणा/ द्वितीयक प्रेरक➖ वह प्रेरणा जो हमे बाहरी रूप से ,किसी भी व्यक्ति,किसी परिस्थिति,या किसी भी वस्तु को देखकर हम प्रेरित होते है। यह प्रेरणा अर्जित या ग्रहण की जाती है। जैसे - दण्ड, पुरूस्कार, कृत्रिम लक्ष्य,सुरक्षा,जिज्ञासा,सामाजिकता, शौक इत्यादि। * प्रेरक - जो हमे अभिप्रेरित करते है । * प्रेरणा - प्रेरक को द...
समस्या समाधान कर्ता एवं वैग्यानिक अन्वेषक के रूप मे बालक
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🔆समस्या समाधक🔆 " बच्चा एक समस्या समाधक के रूप में" ( child as a problem solver) ▪️बच्चे के सामने जी भी समस्या आती है वह उस उसका समाधान खोजने की कोशिश करता है। चाहे जो भी समस्या हो वह उस पर विश्लेषण कर ,उस परिस्थिति को समझ कर एक उचित समाधान निकलता है । ▪️हम समस्या के समाधान के लिए अपनी बुद्धि के द्वारा एक बेहतर उपाय ढूंढकर उसका सही प्रकार से तरीके से उपचार करते है या उस समस्या को दूर कर देते है। ▪️जब हमारे पास समस्या आती है तो उसके लिए हम अपने उत्तम मार्गदर्शन और योग्यता का प्रयोग करके ही एक बेहतर समाधान निकालते है। हमारे मस्तिष्क का ज्ञान ही हमारी समस्या के समाधान की खोजने में हमारी मदद करता है। ▪️समस्या जा समाधान निकालने के लिए कई लोग,माता पिता,शिक्षक एक मार्गदर्शक के रूप में तथा इसके साथ ही हमारे संस्कार हमारे मूल्य एक सर्वोत्तम समाधान खोजने में हमारी मदद करते है। 🔅 गेंने के अनुसार➖ हम जिस भी समस्या जा समाधान निकालते है उसके लिए हम सात सोपान को पार कर आठवें सोपान पर पहुंचकर समस्या का समाधान निकाल लेते है। गेने की पुस्तक- "The conditio...
शिक्षण के चार एवं शिक्षण की अवस्थाए
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🔆शिक्षण के चर एवं शिक्षण की अवस्थाएं🔆 🔅 शिक्षण के चर➖ ऐसी चीजे या ऐसे तत्व, जो शिक्षक को चलाने या execute करने के लिए या शिक्षण प्रक्रिया को सही तरीके से पूर्ण करने के लिए जो सहयोग प्रदान करता है या उस प्रक्रिया के लिए काम आता है,शिक्षक के चर कहलाते है । यह तीन प्रकार के होते हैं। 1) स्वतंत्र चर 2) आश्रित चर 3) हस्तक्षेप चर ▪️1) स्वतंत्र चर➖ शिक्षण व्यवस्था का या शिक्षण कार्य का नियोजन या इस शिक्षण प्रक्रिया का परिचालन का कार्य एक शिक्षक के द्वारा ही पूरा किया जाता है।, इसलिए इसमें शिक्षक को स्वतंत्र चर कहा जाता है ।शिक्षक अपने शिक्षण कार्य का परिचालन सुव्यवस्थित ढ़ंग से , स्वतंत्र रूप से करता है। शिक्षक को पूरी स्वतंत्रता रहती है कि वह अपने शिक्षण कार्य के नियोजन या प्रक्रिया के परिचालन को सुव्यवस्थित रूप से संचालन कर सके । ▪️2) आश्रित चर➖ इसमें छात्र शिक्षक पर आश्रित होते है।छात्र शिक्षक के हिसाब से ही क्रियाशील होते है।शिक्षक द्वारा समझाने , नियोजन करवाने, व्यवस्था करवाना, परिचालन करना जैसे समस्त कार्य शिक्षक करता है और छ...
योजना विधि, किलपैट्रिक के द्वारा
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🔆योजना विधि🔆 ▪️इस विधि को किलपेट्रिक द्वारा दिया गया । ▪️कार्य को सही तरीके से आसान बनाने के लिए हम योजना बनाते है। किसी भी कार्य को करने से पहले हम उसकी एक planning अपनी capacitiy,time और knowledge के हिसाब से करते हैं। ▪️जब भी हम अपने कार्य को सफल तरीके से करना चाहते है तो उसके लिए हमे अपने अनुभव के आधार पर अपना मकसद पूरा कर सकते हैं। ▪️ हमारा मकसद या हमारी शिक्षा का संप्रयोजन होना चाहिए और उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमारे पास एक योजना होना बहुत ज़रूरी है। यदि हम बिना योजना के आधार पर किसी कार्य को करते हैं तो हम अपने कार्य को कभी भी सफल तरीके से पूरा नहीं कर पाएंगे। ▪️शिक्षण के कार्य में शिक्षक को अपने अनुभव के आधार पर एवम् समय क्षमता और ज्ञान के हिसाब से एक योजना बनानी चाहिए जिससे शिक्षण कार्य को सही तरीके से और सफल तरीके से पूरा कर सकते है। ▪️हम अपनी प्रायकिता के आधार पर अपनी capacity,time और knowledge को manage कर अपने कार्य को सफल बना सकते है। ( यदि हम अपने मकसद को या उद्घेश्य को पूरा करना चाहते है तो हम अपना वर्तमान कार्य को बेहतरीन तरीके से करने में सफल...
बुद्धि परीक्षानो का संपूर्ण निचोड़, By Ashwany Dubey.
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#teacher eligibility test बुद्धि का मापन और बुद्धिलब्धि- Intelligence Quotient बुद्धि का मापन और बुद्धिलब्धि Intelligence Quotient:– सबसे पहला बुद्धि परीक्षण 1905 ई. मे अल्फ्रेड बिने ने साइमन की मदद से फ्रांस में बनाया। इस बुद्धि परीक्षण में 30 प्रश्न थे जोकि 3 से 14 वर्ष तक के बालकों के लिए उपयुक्त थे। यह एक शाब्दिक बुद्धि परीक्षण था। यह एक व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण था। इस बुद्धि परीक्षण का नाम बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण था। सर्वप्रथम इस परीक्षण में 1908 में संशोधन हुआ और इस संशोधन में मानसिक आयु की अवधारणा को बुद्धि परीक्षण में शामिल किया गया। इस परीक्षण में दूसरा संशोधन 1911 में हुआ और प्रश्नों की संख्या बढ़ाकर 54 कर दी गई। 1916 में अमरीका की स्टैनफोर्ड वि वि में प्रोफेसर टर्मन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इस परीक्षण में संशोधन किया और प्रश्नों की संख्या 90 कर दी गई। इस परीक्षण में 1911 के परीक्षण से मात्र 19 प्रश्न शामिल किये गये जो कि इस सम्पूर्ण प्रश्नों का 1/3 हिस्सा था। 1916 में इस परीक्षण का नाम बदलकर स्टैनफोर्ड-बिने बुद्धि परीक्षण या टरमन का बुद्धि परीक्षण कर दिया गया। अमेरि...
Thorndike theory for CTET and MPTET, OTHER TET EXAMS
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एडवर्ड एल. थार्नडाइक के अधिगम के सिद्धांत- एडवर्ड एल. थार्नडाइक के अधिगम के सिद्धांत के विभिन्न नाम :- उद्दीपन-अनुक्रिया का सिद्धांत प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत संयोजनवाद का सिद्धांत अधिगम का बन्ध सिद्धांत प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत S-R थ्योरी महत्वपूर्ण तथ्य :- => यह सिद्धांत प्रसिद्ध अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ‘एडवर्ड एल. थार्नडाइक’ द्वारा प्रतिपादित किया गया। => यह सिद्धांत थार्नडाइक द्वारा सन 1913 ई. में दिया गया। => थार्नडाइक ने अपनी पुस्तक “शिक्षा मनोविज्ञान” में इस सिद्धांत का वर्णन किया हैं। => थार्नडाइक ने अपना प्रयोग भूखी बिल्ली पर किया। => भूखी बिल्ली को जिस बॉक्स में बन्ध किया उस बॉक्स को “पज़ल बॉक्स”(Pazzle Box) कहते हैं। => भोजन या उद्दीपक के रूप में थार्नडाइक ने “मछली” को रखा। थार्नडाइक का प्रयोग :- थार्नडाइक ने अपना प्रयोग भूखी बिल्ली पर किया। बिल्ली को कुछ समय तक भूखा रखने के बाद एक पिंजरे(बॉक्स) में बन्ध कर दिया। जिसे “पज़ल बॉक्स”(Pazzle Box) कहते हैं। पिंजरे के बाहर भोजन के रूप में थार्नडाइक ने मछली का टुकड़ा रख दिया। पिंजरे के अन्दर एक लिवर(बटन) ...
शिक्षण अधिगम प्रक्रिया by Ashwany Dubey and Vaishali Mishra
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🔆शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया🔆 ▪️हम शिक्षण को ज्ञान और कौशल के संप्रेषण के रूप में देखते हैं। 🔅ज्ञान और कुशलता - यदि हम अपने सीखे हुए ज्ञान को एक real implementation या उसमे वास्तविक बदलाव कर लेते है तो वहीं कुशलता कहलाती है। ▪️यदि बच्चे से practically कोई काम करवाकर सिखाया जाए फिर उस काम का या उस ज्ञान का implementation किया जाएगा तभी ज्ञान से कुशलता तक जाने की अधिगम प्रक्रिया पूर्ण होगी। ▪️इस प्रक्रिया में सिखाने वाला - सीखने वाले को प्रभावित करता है।, सीखने वाला इसलिए प्रभावित होता है है क्योंकि सीखने के प्रति रुचि, अभिप्रेना की भावना जागृत होती है , और वह उस समय सिखाने वाले (शिक्षक) के व्यक्तित्व, भाव,विचार या उसकी सोच ।सीखने वाले (छात्रों) को ज्यादा प्रभावित कर जाते है। यदि शिक्षक और छात्र एक दूसरे से प्रभावित या जुड़े नहीं होंगे तो अधिगम कार्य कभी सही नहीं हो पाएगा। ▪️शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे सिखाने वाला (शिक्षक) सीखने वाले(छात्र) के लिए विभिन्न परिस्थिती या माहौल या वातावरण में विभिन्न साधनों और विधियों का प्रयोग कर या निर्माण कर ...
Vishleshan and sanshleshan vidhi in detailed with deep explanation for State TET and CTET exams
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🔆 विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि🔆 * किसी विषय को गहराई से जानने,उस विषय के अलग अलग पहलू पर चर्चा करते है या जब हम उस विषय का पूरी तरह से विश्लेषण कर लेते है तब हम उस विषय के बारे में संपूर्ण या परिपूर्ण जानकारी को एकत्र कर लेते है। ✴️ विश्लेषण विधि ➖ गणिततीय दृष्टिकोण से यदि हम किसी समस्या के समाधान को निकालना चाहते हैं तो उसके लिए हम उस समस्या का विश्लेषण यानि कि उस समस्या के दुकड़े दुकड़े कर या उस अलग अलग करते हुए समाधान निकलते है। ▪️जब हम समस्या का समाधान खोजते है तो समाधान को खोजने में के लिए हम उस समस्या का विश्लेषण करते हैं जिसके फलस्वरूप हमे समस्या का समाधान मिल जाता है। ▪️यह विधि एक अनुसंधान है क्योंकि इसमें हल को खोजने पर बल दिया जाता है।( खोज करना या समस्या पर माथा पच्ची या दिमाग लगाकर या उस समस्या पर पंचायत कर या कहे विश्लेषण कर उस समस्या का उचित समाधान निकाला जा सकता है।) ▪️किसी भी विषय या वस्तु जो हमे जटिल लगती है उनको सरल बनाने के लिए ,इसके साथ ही जो विषय या चीजे जो हम नहीं जानते है या हम उससे अज्ञात है, उन्हें जानने के लिए या उन्हें ज्ञात करने के लिए इस विधि को प्र...